बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू।।
मूल पाठ
अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू।।
होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी।।
स्रोत अभिलेख 1.213 · पुस्तक पृ. 211, 212
भावार्थ
मूल पाठ के बादजहाँ जनकजीका अत्यन्त अनुपम (सुन्दर) निवासस्थान (महल) है, वहाँके विलास (ऐश्वर्य)को देखकर देवता भी थकित (स्तम्भित) हो जाते हैं [मनुष्योंकी तो बात ही क्या!]। कोट (राजमहलके परकोटे) को देखकर चित्त चकित हो जाता है, [ऐसा मालूम होता है] मानो उसने समस्त लोकोंकी शोभाको रोक (घेर) रखा है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 212 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू।।
English explanation
The place where King Janaka resides is utterly incomparable; even the gods are overwhelmed on seeing its splendour.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | extremely |
| अनूप | अनुपम | incomparable |
| जहँ | जहाँ | where |
| जनक | सीता के पिता राजा जनक | King Janaka, Sita's father |
| निवासू | निवास है | has his residence |
| बिथकहिं | थककर अभिभूत हो जाते हैं | become overwhelmed and weary |
| बिबुध | देवता | the gods |
| बिलोकि | देखकर | on seeing |
| बिलासू | वैभव | splendour |
2 होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी।।
English explanation
The mind is astonished on seeing the palace's fortified enclosure, as though the beauty of all the worlds had been gathered and held there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होत | हो जाता है | becomes |
| चकित | चकित | astonished |
| चित | मन | the mind |
| कोट | परकोटा; दुर्गबंदी | fortified enclosure; ramparts |
| बिलोकी | देखकर | on seeing |
| सकल | समस्त | all |
| भुवन | लोकों की | of the worlds |
| सोभा | सुंदरता | beauty |
| जनु | मानो | as though |
| रोकी | रोककर रख ली गई हो | had been held there |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.213
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 212
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका जनकपुरमें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 211, 212
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।