बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अग जगमय सब रहित बिरागी। प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी।।
मूल पाठ
अग जगमय सब रहित बिरागी। प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी।।
मोर बचन सब के मन माना। साधु साधु करि ब्रह्म बखाना।।
स्रोत अभिलेख 1.185 · पुस्तक पृ. 186, 186
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे चराचरमय (चराचरमें व्याप्त) होते हुए ही सबसे रहित हैं और विरक्त हैं (उनकी कहीं आसक्ति नहीं है); वे प्रेमसे प्रकट होते हैं, जैसे अग्रि। (अग्रि अव्यक्तरूपसे सर्वत्र व्याप्त है, परन्तु जहाँ उसके लिये अरणिमन्थनादि साधन किये जाते हैं, वहाँ वह प्रकट होती है। इसी प्रकार सर्वत्र व्याप्त भगवान् भी प्रेमसे प्रकट होते हैं।) मेरी बात सबको प्रिय लगी। ब्रह्माजीने 'साधु, साधु कहकर बड़ाई की॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 186 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अग जगमय सब रहित बिरागी। प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी।।
English explanation
The Lord pervades all that is immobile and moving, yet is free of everything and unattached; through love he manifests like fire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अग | अचर जगत | the immobile creation |
| जगमय | चर जगत में व्याप्त | pervading moving creation |
| सब | सबसे | of everything |
| रहित | रहित | free |
| बिरागी | अनासक्त | unattached |
| प्रेम | प्रेम | love |
| तें | से | through |
| प्रभु | भगवान | the Lord |
| प्रगटइ | प्रकट होते हैं | manifests |
| जिमि | जैसे | like |
| आगी | अग्नि | fire |
2 मोर बचन सब के मन माना। साधु साधु करि ब्रह्म बखाना।।
English explanation
Everyone accepted my words in their hearts. Brahma praised them, saying, ‘Well said! Well said!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरी | my |
| बचन | बात | words |
| सब | सब | everyone |
| के | के | of |
| मन | मन को | to the hearts |
| माना | स्वीकार्य हुई | was acceptable |
| साधु | बहुत अच्छा | well said |
| साधु | बहुत अच्छा | well said |
| करि | कहकर | saying |
| ब्रह्म | ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता | Brahma, the creator |
| बखाना | प्रशंसा की | praised |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.185
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 186
- सहायक विषय
- पृथ्वी और देवतादिकी करुण पुकार
- मुद्रित पृष्ठ
- 186, 186
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।