बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अग्य अकोबिद अंध अभागी। काई बिषय मुकर मन लागी।।
मूल पाठ
अग्य अकोबिद अंध अभागी। काई बिषय मुकर मन लागी।।
लंपट कपटी कुटिल बिसेषी। सपनेहुँ संतसभा नहिं देखी।।
स्रोत अभिलेख 1.115 · पुस्तक पृ. 127, 128
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो अज्ञानी, मूर्ख, अंधे और भाग्यहीन हैं और जिनके मनरूपी दर्पणपर विषयरूपी काई जमी हुई है; जो व्यभिचारी, छली और बड़े कुटिल हैं और जिन्होंने कभी स्वप्रमें भी संत-समाजके दर्शन नहीं किये;॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 127 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अग्य अकोबिद अंध अभागी। काई बिषय मुकर मन लागी।।
English explanation
AI-draft interpretation: They are ignorant, undiscerning, blind, and unfortunate; the mirror of their minds is coated with the scum of sensual attachments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अग्य | अज्ञानी | ignorant |
| अकोबिद | अविवेकी; समझ से रहित | undiscerning; lacking understanding |
| अंध | विवेक की दृष्टि से अंधे | blind in discernment |
| अभागी | अभागे | unfortunate |
| काई | काई; मैल की परत | scum; a coating of grime |
| बिषय | इंद्रियों के विषयों की | of sense objects and sensual attachments |
| मुकर | दर्पण | mirror |
| मन | मन | mind |
| लागी | लगी हुई है | has adhered |
2 लंपट कपटी कुटिल बिसेषी। सपनेहुँ संतसभा नहिं देखी।।
English explanation
They are lustful, deceitful, and exceedingly crooked; they have never seen a gathering of saints, even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लंपट | लंपट; विषयासक्त | lustful; sensual |
| कपटी | छल करने वाले | deceitful |
| कुटिल | टेढ़े स्वभाव वाले | crooked in character |
| बिसेषी | अत्यंत; विशेष रूप से | exceedingly; especially |
| सपनेहुँ | सपने में भी | even in a dream |
| संतसभा | संतों की सभा | a gathering of saints |
| नहिं | नहीं | not |
| देखी | देखी है | have seen |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 127
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 127, 128
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।