बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहिं ते बेद असंमत बानी। जिन्ह कें सूझ लाभु नहिं हानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर जिन्हें अपनी लाभ-हानि नहीं सूझती, वे ही ऐसी वेदविरुद्ध बातें कहा करते हैं। जिनका हृदयरूपी दर्पण मैला है और जो नेत्रोंसे हीन हैं, वे बेचारे श्रीरामचन्द्रजीका रूप कैसे देखें!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 127 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहहिं ते बेद असंमत बानी। जिन्ह कें सूझ लाभु नहिं हानी।।
मुकर मलिन अरु नयन बिहीना। राम रूप देखहिं किमि दीना।।
स्रोत अभिलेख 1.115 · पुस्तक पृ. 127, 128
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहहिं ते बेद असंमत बानी। जिन्ह कें सूझ लाभु नहिं हानी।।
English explanation
Those who cannot discern benefit from harm speak words not sanctioned by the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | say |
| ते | वे | they |
| बेद | वेदों द्वारा | by the Vedas |
| असंमत | असम्मत; स्वीकार न की गई | not sanctioned; disapproved |
| बानी | वाणी; बातें | words; speech |
| जिन्ह | जिन लोगों | those whom |
| कें | को | to |
| सूझ | समझ; पहचान | discernment |
| लाभु | लाभ; हित | benefit |
| नहिं | नहीं | not |
| हानी | हानि; अहित | harm; loss |
2 मुकर मलिन अरु नयन बिहीना। राम रूप देखहिं किमि दीना।।
English explanation
The mirror is soiled, and they lack eyes; how can such pitiable people behold Rama’s form?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुकर | दर्पण | mirror |
| मलिन | मैला | soiled |
| अरु | और | and |
| नयन | आँखों से | of eyes |
| बिहीना | रहित | deprived |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| रूप | रूप | form |
| देखहिं | देख सकते हैं | can behold |
| किमि | कैसे | how |
| दीना | बेचारे; दीन जन | pitiable people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 127
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 127, 128
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।