बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिन्ह कें अगुन न सगुन बिबेका। जल्पहिं कल्पित बचन अनेका।।
मूल पाठ
जिन्ह कें अगुन न सगुन बिबेका। जल्पहिं कल्पित बचन अनेका।।
हरिमाया बस जगत भ्रमाहीं। तिन्हहि कहत कछु अघटित नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.115 · पुस्तक पृ. 127, 128
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनको निर्गुण-सगुणका कुछ भी विवेक नहीं है, जो अनेक मनगढ़ंत बातें बका करते हैं, जो श्रीहरिकी मायाके वशमें होकर जगत्में (जन्म-मृत्युके चक्रमें) भ्रमते फिरते हैं, उनके लिये कुछ भी कह डालना असम्भव नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 127 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जिन्ह कें अगुन न सगुन बिबेका। जल्पहिं कल्पित बचन अनेका।।
English explanation
Those who lack discernment of the attributeless and the qualified divine utter many fabricated claims.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन लोगों | those whom |
| कें | को | to |
| अगुन | निर्गुण स्वरूप का | of the divine without attributes |
| न | नहीं | no; not |
| सगुन | सगुण स्वरूप का | of the divine with attributes |
| बिबेका | विवेक; यथार्थ समझ | discernment; true understanding |
| जल्पहिं | बकते हैं | prattle; utter |
| कल्पित | मनगढ़ंत | fabricated |
| बचन | बातें | statements |
| अनेका | अनेक | many |
2 हरिमाया बस जगत भ्रमाहीं। तिन्हहि कहत कछु अघटित नाहीं।।
English explanation
For those who wander deluded in the world under Hari’s maya, there is nothing surprising in anything they might say.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरिमाया | हरि की माया के | of Hari’s illusion-producing power |
| बस | वश में | under the sway |
| जगत | संसार में | in the world |
| भ्रमाहीं | भ्रमित होकर भटकते हैं | wander deluded |
| तिन्हहि | उन्हीं लोगों के लिए | for those very people |
| कहत | कहने में | in saying |
| कछु | कुछ भी | anything |
| अघटित | असंभव या अनहोना | impossible or extraordinary |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 127
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 127, 128
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।