बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अंतरहित सुर आसिष देहीं। मुदित मातु अंचल भरि लेंहीं।।
मूल पाठ
अंतरहित सुर आसिष देहीं। मुदित मातु अंचल भरि लेंहीं।।
भूपति बोलि बराती लीन्हे। जान बसन मनि भूषन दीन्हे।।
स्रोत अभिलेख 1.351 · पुस्तक पृ. 332, 333
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवता छिपे हुए [अन्तरिक्षसे] आशीर्वाद दे रहे हैं और माताएँ आनन्दित हो आँचल भरकर ले रही हैं। तदनन्तर राजाने बरातियोंको बुलवा लिया और उन्हें सवारियाँ, वस्त्र, मणि (रत्न) और आभूषणादि दिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 332 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अंतरहित सुर आसिष देहीं। मुदित मातु अंचल भरि लेंहीं।।
English explanation
The unseen gods give blessings; the joyful mothers receive them with their laps held open.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंतरहित | अदृश्य रहकर | remaining unseen |
| सुर | देवता | the gods |
| आसिष | आशीर्वाद | blessings |
| देहीं | देते हैं | give |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| मातु | माताएँ | the mothers |
| अंचल | आँचल | the folds of their garments |
| भरि | भरकर | filling |
| लेंहीं | ग्रहण करती हैं | receive |
2 भूपति बोलि बराती लीन्हे। जान बसन मनि भूषन दीन्हे।।
English explanation
The king summoned the wedding guests and gave them conveyances, clothing, gems, and ornaments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपति | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| बोलि | बुलाकर | having called |
| बराती | बारातियों को | the wedding-party members |
| लीन्हे | बुला लिया | gathered them |
| जान | वाहन, सवारियाँ | vehicles, conveyances |
| बसन | वस्त्र | clothing |
| मनि | रत्न | gems |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| दीन्हे | दिए | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.351
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 332
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 332, 333
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।