बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आयसु पाइ राखि उर रामहि। मुदित गए सब निज निज धामहि।।
मूल पाठ
आयसु पाइ राखि उर रामहि। मुदित गए सब निज निज धामहि।।
पुर नर नारि सकल पहिराए। घर घर बाजन लगे बधाए।।
स्रोत अभिलेख 1.351 · पुस्तक पृ. 332, 333
भावार्थ
मूल पाठ के बादआज्ञा पाकर, श्रीरामजीको हृदयमें रखकर वे सब आनन्दित होकर अपने-अपने घर गये। नगरके समस्त स्त्री-पुरुषोंको राजाने कपड़े और गहने पहनाये। घर-घर बधावे बजने लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 332 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आयसु पाइ राखि उर रामहि। मुदित गए सब निज निज धामहि।।
English explanation
Receiving leave to depart and holding Rama in their hearts, all joyfully went to their respective homes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | विदा की अनुमति | permission to depart |
| पाइ | पाकर | having received |
| राखि | रखकर | having kept |
| उर | हृदय में | in their hearts |
| रामहि | राम को | Rama |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| गए | गए | went |
| सब | सभी | all |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने-अपने | respective |
| धामहि | घरों को | to their homes |
2 पुर नर नारि सकल पहिराए। घर घर बाजन लगे बधाए।।
English explanation
All the men and women of the city were presented with clothing; celebratory music began sounding in every home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| सकल | सभी | all |
| पहिराए | वस्त्र पहनाए, भेंट किए | clothed, presented with garments |
| घर | घर | home |
| घर | हर घर में | in every home |
| बाजन | बजने | to sound |
| लगे | लगे | began |
| बधाए | बधाई के बाजे | celebratory music |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.351
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 332
- सहायक विषय
- बारातका अयोध्या लौटना और अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 332, 333
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।