अयोध्याकाण्ड · सोरठा 226 · सोरठा
सुनत सुमंगल बैन मन प्रमोद तन पुलक भर।
सुनत सुमंगल बैन मन प्रमोद तन पुलक भर।
सरद सरोरुह नैन तुलसी भरे सनेह जल॥ २२६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.226 · पुस्तक पृ. 531, 532
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनत सुमंगल बैन मन प्रमोद तन पुलक भर।
अत्यंत मंगलमय वचन सुनते ही राम का मन आनंद से और शरीर रोमांच से भर गया।
English explanation
On hearing the most auspicious words, Rama’s mind filled with joy and his body thrilled with goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| सुमंगल | अत्यंत मंगलमय | most auspicious |
| बैन | वचन | words |
| मन | मन में | in the mind |
| प्रमोद | आनंद | joy |
| तन | शरीर में | in the body |
| पुलक | रोमांच | goosebumps of delight |
| भर | भर गया | became filled |
2सरद सरोरुह नैन तुलसी भरे सनेह जल॥ २२६॥
तुलसी कहते हैं: राम के शरद ऋतु के कमलों जैसे नेत्र प्रेम के आँसुओं से भर गए।
English explanation
Tulsidas says: Rama’s eyes, like autumn lotuses, filled with tears of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरद | शरद ऋतु के | autumn |
| सरोरुह | कमलों जैसे | lotus-like |
| नैन | नेत्र | eyes |
| तुलसी | कवि तुलसीदास कहते हैं | the poet Tulsidas says |
| भरे | भर गए | became filled |
| सनेह | प्रेम के | of love |
| जल | आँसुओं से | with tears |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- सोरठा 226
- स्रोत अभिलेख
- 2.226
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 531, 532
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।