अयोध्याकाण्ड · सोरठा 151 · सोरठा
गुर सन कहब सँदेसु बार बार पद पदुम गहि।
गुर सन कहब सँदेसु बार बार पद पदुम गहि।
करब सोइ उपदेसु जेहिं न सोच मोहि अवधपति॥ १५१॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.151 · पुस्तक पृ. 469, 469
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1गुर सन कहब सँदेसु बार बार पद पदुम गहि।
गुरु के कमल जैसे चरण बार-बार पकड़कर उनसे यह संदेश कहना।
English explanation
Repeatedly clasping the guru’s lotus-like feet, convey this message to him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the guru Vashishtha |
| सन | से | to |
| कहब | कहना | convey |
| सँदेसु | संदेश | the message |
| बार | बार | time |
| बार | बार; बार-बार | after time; repeatedly |
| पद | चरण | feet |
| पदुम | कमल जैसे | lotus-like |
| गहि | पकड़कर | having clasped |
2करब सोइ उपदेसु जेहिं न सोच मोहि अवधपति॥ १५१॥
ऐसा ही उपदेश दीजिए जिससे अवधपति दशरथ मेरे लिए चिंता न करें।
English explanation
Give such counsel that Dasharatha, lord of Ayodhya, does not worry about me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करब | दीजिए | please give |
| सोइ | वही; ऐसा ही | that very; such |
| उपदेसु | उपदेश | counsel |
| जेहिं | जिससे | so that |
| न | नहीं | not |
| सोच | चिंता | worry |
| मोहि | मेरे लिए | about me |
| अवधपति | अवध के स्वामी दशरथ | Dasharatha, lord of Ayodhya |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- सोरठा 151
- स्रोत अभिलेख
- 2.151
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 469, 469
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