अयोध्याकाण्ड · दोहा 152 · दोहा/सोरठा
कहि प्रनाम कछु कहन लिय सिय भइ सिथिल सनेह।
कहि प्रनाम कछु कहन लिय सिय भइ सिथिल सनेह।
थकित बचन लोचन सजल पुलक पल्लवित देह।।152।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.152 · पुस्तक पृ. 470, 470
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कहि प्रनाम कछु कहन लिय सिय भइ सिथिल सनेह।
प्रणाम कहकर सीता कुछ कहने लगीं, पर स्नेह से शिथिल हो गईं।
English explanation
After conveying her respects, Sita began to say something, but became overcome with affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | having expressed |
| प्रनाम | प्रणाम; आदरपूर्ण अभिवादन | respectful greetings |
| कछु | कुछ | something |
| कहन | कहने | to say |
| लिय | लगीं; कहने का आरंभ किया | began |
| सिय | सीता; राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| भइ | हो गईं | became |
| सिथिल | शिथिल; भाव से विवश | faint; emotionally overcome |
| सनेह | स्नेह से | with affection |
2 थकित बचन लोचन सजल पुलक पल्लवित देह।।152।।
उनकी वाणी रुक गई, आँखें आँसुओं से भर गईं और शरीर रोमांच से खिल उठा।
English explanation
Her speech faltered, her eyes filled with tears, and her body blossomed with goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| थकित | रुके हुए; आगे न निकल सके | faltering; unable to continue |
| बचन | वचन; वाणी | words; speech |
| लोचन | आँखें | eyes |
| सजल | आँसुओं से भरी | filled with tears |
| पुलक | रोमांच; रोम खड़े होना | goosebumps; hair standing on end |
| पल्लवित | खिली हुई; रोमांच से उभरी | blossoming with goosebumps |
| देह | देह; शरीर | body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 152
- स्रोत अभिलेख
- 2.152
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 470, 470
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