अयोध्याकाण्ड · दोहा 153 · दोहा/सोरठा
भयउ कोलाहलु अवध अति सुनि नृप राउर सोरु।
भयउ कोलाहलु अवध अति सुनि नृप राउर सोरु।
बिपुल बिहग बन परेउ निसि मानहुँ कुलिस कठोरु।।153।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.153 · पुस्तक पृ. 470, 471
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भयउ कोलाहलु अवध अति सुनि नृप राउर सोरु।
राजमहल का शोर सुनकर अयोध्या में अत्यंत कोलाहल मच गया।
English explanation
Hearing the outcry from the royal palace, Ayodhya erupted into a great uproar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गया | arose |
| कोलाहलु | कोलाहल | uproar |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| अति | बहुत अधिक | very great |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| नृप | राजा के | the king’s |
| राउर | महल का | palace’s |
| सोरु | शोर | outcry |
2 बिपुल बिहग बन परेउ निसि मानहुँ कुलिस कठोरु।।153।।
मानो रात में बहुत-से पक्षियों वाले वन पर कठोर वज्र गिर पड़ा हो।
English explanation
It was as though a mighty thunderbolt had struck a forest full of birds at night.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिपुल | बहुत-से | numerous |
| बिहग | पक्षियों वाला | containing birds |
| बन | वन पर | upon a forest |
| परेउ | गिर पड़ा | fell |
| निसि | रात में | at night |
| मानहुँ | मानो | as though |
| कुलिस | वज्र | a thunderbolt |
| कठोरु | कठोर और प्रचंड | mighty and devastating |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 153
- स्रोत अभिलेख
- 2.153
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 470, 471
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