अयोध्याकाण्ड · दोहा 154 · दोहा/सोरठा
प्रिया बचन मृदु सुनत नृपु चितयउ आँखि उघारि।
प्रिया बचन मृदु सुनत नृपु चितयउ आँखि उघारि।
तलफत मीन मलीन जनु सींचत सीतल बारि।।154।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.154 · पुस्तक पृ. 471, 472
भावार्थ और शब्दार्थ
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1प्रिया बचन मृदु सुनत नृपु चितयउ आँखि उघारि।
प्रिय पत्नी के कोमल वचन सुनकर राजा ने आँखें खोलकर देखा।
English explanation
Hearing his beloved wife's gentle words, the king opened his eyes and looked.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रिया | प्रिय पत्नी के | of his beloved wife |
| बचन | वचन | words |
| मृदु | कोमल | gentle |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| नृपु | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| चितयउ | देखा; दृष्टि डाली | looked |
| आँखि | आँखें | eyes |
| उघारि | खोलकर | having opened |
2 तलफत मीन मलीन जनु सींचत सीतल बारि।।154।।
मानो तड़पती, निढाल मछली को ठंडे जल से सींचा जा रहा हो।
English explanation
It was as though a struggling, enfeebled fish were being sprinkled with cool water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तलफत | तड़पती हुई | struggling; writhing |
| मीन | मछली | fish |
| मलीन | निढाल; म्लान | enfeebled; languishing |
| जनु | मानो | as though |
| सींचत | सींचते हुए | sprinkling; moistening |
| सीतल | ठंडा | cool |
| बारि | जल | water |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 154
- स्रोत अभिलेख
- 2.154
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 471, 472
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