अयोध्याकाण्ड · दोहा 78 · दोहा/सोरठा
-सिख सीतलि हित मधुर मृदु सुनि सीतहि न सोहानि।
-सिख सीतलि हित मधुर मृदु सुनि सीतहि न सोहानि।
सरद चंद चंदनि लगत जनु चकई अकुलानि।।78।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.78 · पुस्तक पृ. 408, 408
भावार्थ और शब्दार्थ
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1-सिख सीतलि हित मधुर मृदु सुनि सीतहि न सोहानि।
शांतिदायक, हितकारी, मधुर और कोमल सीख सुनकर भी वह सीता को अच्छी नहीं लगी।
English explanation
Even upon hearing this soothing, well-meaning, sweet, and gentle advice, Sita found it unappealing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिख | सीख; सलाह | advice |
| सीतलि | शांतिदायक; शीतल | soothing; cooling |
| हित | हितकारी | well-meaning; beneficial |
| मधुर | मधुर | sweet |
| मृदु | कोमल | gentle |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सीतहि | सीता को | to Sita |
| न | नहीं | not |
| सोहानि | अच्छी लगी | was pleasing |
2 सरद चंद चंदनि लगत जनु चकई अकुलानि।।78।।
मानो शरद के चंद्रमा की चाँदनी पड़ने पर चकई व्याकुल हो उठी हो।
English explanation
It was as though a female chakravaka bird grew distressed when touched by the autumn moonlight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरद | शरद ऋतु का | of autumn |
| चंद | चंद्रमा | moon |
| चंदनि | चाँदनी | moonlight |
| लगत | पड़ने पर | upon falling on her |
| जनु | मानो | as though |
| चकई | चकवा पक्षी की मादा; चकई | female chakravaka bird |
| अकुलानि | व्याकुल हो गई | became distressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 78
- स्रोत अभिलेख
- 2.78
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 408, 408
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