अयोध्याकाण्ड · दोहा 79 · दोहा/सोरठा
सजि बन साजु समाजु सबु बनिता बंधु समेत।
सजि बन साजु समाजु सबु बनिता बंधु समेत।
बंदि बिप्र गुर चरन प्रभु चले करि सबहि अचेत।।79।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.79 · पुस्तक पृ. 408, 409
भावार्थ और शब्दार्थ
1सजि बन साजु समाजु सबु बनिता बंधु समेत।
पत्नी और भाई सहित वन के लिए सारी आवश्यक सामग्री तैयार करके—
English explanation
Having readied all the equipment for forest life, together with his wife and brother—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजि | तैयार करके; सजाकर | having prepared |
| बन | वन के लिए | for the forest |
| साजु | साज; आवश्यक उपकरण | equipment |
| समाजु | सामग्री का समूचा संग्रह | collection of supplies |
| सबु | सब; सारा | all |
| बनिता | पत्नी सीता | his wife Sita |
| बंधु | भाई लक्ष्मण | his brother Lakshmana |
| समेत | सहित | together with |
2 बंदि बिप्र गुर चरन प्रभु चले करि सबहि अचेत।।79।।
ब्राह्मणों और गुरु के चरणों में प्रणाम करके प्रभु राम चले गए, और सबको सुध-बुध से रहित कर गए।
English explanation
Bowing at the feet of the Brahmins and his guru, Lord Rama departed, leaving everyone bereft of their senses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदि | वंदना करके; प्रणाम करके | having bowed in reverence |
| बिप्र | ब्राह्मणों के | of the Brahmins |
| गुर | गुरु के | of the guru |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| चले | चल दिए | departed |
| करि | करके; बनाकर | having made; leaving |
| सबहि | सबको | everyone |
| अचेत | सुध-बुध से रहित | bereft of their senses |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 79
- स्रोत अभिलेख
- 2.79
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 408, 409
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।