अयोध्याकाण्ड · दोहा 99 · दोहा/सोरठा
-रथ हाँकेउ हय राम तन हेरि हेरि हिहिनाहिं।
-रथ हाँकेउ हय राम तन हेरि हेरि हिहिनाहिं।
देखि निषाद बिषादबस धुनहिं सीस पछिताहिं।।99।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.99 · पुस्तक पृ. 425, 425
भावार्थ और शब्दार्थ
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1-रथ हाँकेउ हय राम तन हेरि हेरि हिहिनाहिं।
सुमंत्र ने रथ चलाया; घोड़े राम की ओर बार-बार देखकर हिनहिनाने लगे।
English explanation
Sumantra drove the chariot; the horses neighed, looking repeatedly toward Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रथ | रथ | the chariot |
| हाँकेउ | चलाया | drove |
| हय | घोड़े | the horses |
| राम | राम की | Rama's |
| तन | ओर | direction |
| हेरि | देखकर | looking |
| हेरि | फिर देखकर | looking again |
| हिहिनाहिं | हिनहिनाते हैं | neigh |
2 देखि निषाद बिषादबस धुनहिं सीस पछिताहिं।।99।।
यह देखकर निषाद लोग दुःख के वश होकर सिर पीटते और पछताते हैं।
English explanation
Seeing this, the Nishadas, overcome with grief, beat their heads and lament.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing this |
| निषाद | निषाद लोग | the Nishada people |
| बिषादबस | विषाद के वश में | overcome with grief |
| धुनहिं | पीटते हैं | beat |
| सीस | सिर | their heads |
| पछिताहिं | पछताते, शोक करते हैं | lament and grieve |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 99
- स्रोत अभिलेख
- 2.99
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 425, 425
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