अयोध्याकाण्ड · सोरठा 100 · सोरठा
सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे।
सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे।
बिहसे करुनाऐन चितइ जानकी लखन तन॥ १००॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 426, 426
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे।
केवट के प्रेम में लिपटे अटपटे वचन सुनकर—
English explanation
Hearing the boatman’s quaint words, wrapped in love—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| केवट | नाविक | the boatman |
| के | के | of |
| बैन | वचन | words |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| लपेटे | लिपटे हुए | wrapped |
| अटपटे | अनोखे, कुछ अटपटे | quaint and unconventional |
2बिहसे करुनाऐन चितइ जानकी लखन तन॥ १००॥
करुणा के धाम राम जानकी और लक्ष्मण की ओर देखकर मुस्कराए।
English explanation
Rama, the abode of compassion, smiled, looking toward Sita and Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिहसे | मुस्कराए | smiled |
| करुनाऐन | करुणा के धाम राम | Rama, the abode of compassion |
| चितइ | देखकर | looking |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| तन | की ओर | toward |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- सोरठा 100
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 426, 426
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।