अयोध्याकाण्ड · दोहा 101 · दोहा/सोरठा
पद पखारि जलु पान करि आपु सहित परिवार।
पद पखारि जलु पान करि आपु सहित परिवार।
पितर पारु करि प्रभुहि पुनि मुदित गयउ लेइ पार।।101।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.101 · पुस्तक पृ. 427, 428
भावार्थ और शब्दार्थ
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1पद पखारि जलु पान करि आपु सहित परिवार।
चरण धोकर केवट ने स्वयं अपने परिवार सहित वह जल पिया।
English explanation
After washing the feet, the boatman drank that water together with his family.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पद | चरण | feet |
| पखारि | धोकर | having washed |
| जलु | चरण धोने का जल | the foot-washing water |
| पान | पीना | drinking |
| करि | करके | having done |
| आपु | स्वयं | himself |
| सहित | साथ | together with |
| परिवार | परिवार | his family |
2 पितर पारु करि प्रभुहि पुनि मुदित गयउ लेइ पार।।101।।
अपने पूर्वजों को भवसागर से पार करके, फिर वह प्रसन्न होकर प्रभु को नदी के पार ले गया।
English explanation
Having delivered his ancestors across worldly existence, he then joyfully took the Lord across the river.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पितर | पूर्वजों को | his ancestors |
| पारु | भवसागर से पार | across worldly existence |
| करि | करके | having brought |
| प्रभुहि | प्रभु राम को | Lord Rama |
| पुनि | फिर | then |
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| गयउ | गया | went |
| लेइ | लेकर | taking him |
| पार | नदी के दूसरे किनारे | to the other bank of the river |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 101
- स्रोत अभिलेख
- 2.101
- सहायक विषय
- केवटका प्रेम और गङ्गा-पार जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 427, 428
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