अयोध्याकाण्ड · दोहा 33 · दोहा/सोरठा
होत प्रात मुनिबेष धरि जौं न रामु बन जाहिं।
होत प्रात मुनिबेष धरि जौं न रामु बन जाहिं।
मोर मरनु राउर अजस नृप समुझिअ मन माहिं।।33।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.33 · पुस्तक पृ. 371, 371
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1होत प्रात मुनिबेष धरि जौं न रामु बन जाहिं।
यदि प्रातः होते ही मुनि का वेश धारण करके राम वन नहीं जाते—
English explanation
If, at daybreak, Rama does not put on an ascetic’s garb and go to the forest—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होत | होते ही | as soon as it becomes |
| प्रात | प्रातः; सुबह | morning |
| मुनिबेष | मुनि का वेश | an ascetic’s garb |
| धरि | धारण करके | having put on |
| जौं | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| रामु | राम | Rama |
| बन | वन को | to the forest |
| जाहिं | जाते हैं | goes |
2 मोर मरनु राउर अजस नृप समुझिअ मन माहिं।।33।।
तो मेरी मृत्यु और आपका अपयश निश्चित है; हे राजा, इसे मन में समझ लीजिए।
English explanation
Then my death and your disgrace will follow; O king, understand this clearly in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोर | मेरी | my |
| मरनु | मृत्यु | death |
| राउर | आपका | your |
| अजस | अपयश | disgrace |
| नृप | हे राजा | O king |
| समुझिअ | समझ लीजिए | understand; bear in mind |
| मन | मन | your heart |
| माहिं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 33
- स्रोत अभिलेख
- 2.33
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 371, 371
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