अयोध्याकाण्ड · दोहा 34 · दोहा/सोरठा
देखी ब्याधि असाध नृपु परेउ धरनि धुनि माथ।
देखी ब्याधि असाध नृपु परेउ धरनि धुनि माथ।
कहत परम आरत बचन राम राम रघुनाथ।।34।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.34 · पुस्तक पृ. 372, 372
भावार्थ और शब्दार्थ
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1देखी ब्याधि असाध नृपु परेउ धरनि धुनि माथ।
इस व्याधि को असाध्य देखकर राजा सिर पीटते हुए धरती पर गिर पड़े।
English explanation
Seeing this affliction to be incurable, the king fell to the ground, beating his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखी | देखकर | seeing |
| ब्याधि | व्याधि को | the affliction |
| असाध | असाध्य | incurable |
| नृपु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| परेउ | गिर पड़े | fell |
| धरनि | धरती पर | to the ground |
| धुनि | पीटते हुए | beating |
| माथ | सिर | his head |
2 कहत परम आरत बचन राम राम रघुनाथ।।34।।
वे अत्यंत व्याकुल होकर ‘राम! राम! रघुनाथ!’ कहते रहे।
English explanation
In utter anguish, he kept crying, ‘Rama! Rama! Lord of the Raghu lineage!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | uttering |
| परम | अत्यंत | utterly |
| आरत | व्याकुल | anguished |
| बचन | वचन | words |
| राम | हे राम! | O Rama! |
| राम | हे राम! | O Rama! |
| रघुनाथ | हे रघुवंश के स्वामी राम! | O Rama, lord of the Raghu lineage! |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 34
- स्रोत अभिलेख
- 2.34
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 372, 372
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