अयोध्याकाण्ड · दोहा 35 · दोहा/सोरठा
मरम बचन सुनि राउ कह कहु कछु दोषु न तोर।
मरम बचन सुनि राउ कह कहु कछु दोषु न तोर।
लागेउ तोहि पिसाच जिमि कालु कहावत मोर।।35।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.35 · पुस्तक पृ. 372, 373
भावार्थ और शब्दार्थ
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1मरम बचन सुनि राउ कह कहु कछु दोषु न तोर।
मर्म को चोट पहुँचाने वाले वचन सुनकर राजा कहते हैं, ‘कहो; तुम्हारा कोई दोष नहीं है।’
English explanation
Hearing these piercing words, the king says, ‘Speak; there is no fault of yours.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मरम | मर्म को चोट पहुँचाने वाले | piercing the heart |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कह | कहते हैं | says |
| कहु | कहो | speak |
| कछु | कोई भी | any |
| दोषु | दोष | fault |
| न | नहीं | not |
| तोर | तुम्हारा | yours |
2 लागेउ तोहि पिसाच जिमि कालु कहावत मोर।।35।।
मेरा काल तुम्हें पिशाच की तरह लग गया है और तुमसे ये बातें कहलवा रहा है।
English explanation
My doom has possessed you like a demon and is making you speak these words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लागेउ | लग गया है | has possessed |
| तोहि | तुम्हें | you |
| पिसाच | पिशाच | a possessing demon |
| जिमि | की तरह | like |
| कालु | मृत्यु या विनाश का समय | doom or approaching death |
| कहावत | कहलवा रहा है | is making you say |
| मोर | मेरा | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 35
- स्रोत अभिलेख
- 2.35
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 372, 373
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