अयोध्याकाण्ड · दोहा 36 · दोहा/सोरठा
परेउ राउ कहि कोटि बिधि काहे करसि निदानु।
परेउ राउ कहि कोटि बिधि काहे करसि निदानु।
कपट सयानि न कहति कछु जागति मनहुँ मसानु।।36।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.36 · पुस्तक पृ. 373, 374
भावार्थ और शब्दार्थ
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1परेउ राउ कहि कोटि बिधि काहे करसि निदानु।
राजा यह कहकर गिर पड़े; उन्होंने अनेक प्रकार से कहा, ‘तुम क्यों मेरा अंत कर रही हो?’
English explanation
The king fell after speaking, pleading in countless ways, ‘Why are you bringing about my end?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परेउ | गिर पड़े | fell down |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कहि | कहकर | having said |
| कोटि | करोड़ों, असंख्य | countless |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| काहे | क्यों | why |
| करसि | तुम करती हो | you bring about |
| निदानु | अंत, विनाश | death or destruction |
2 कपट सयानि न कहति कछु जागति मनहुँ मसानु।।36।।
कपट में चतुर कैकेयी कुछ नहीं कहती; वह जागती हुई मानो श्मशान-सी निस्तब्ध है।
English explanation
Kaikeyi, skilled in deceit, says nothing; awake, she is as silent as a cremation ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपट | कपट में | in deceit |
| सयानि | चतुर स्त्री | the clever woman |
| न | नहीं | not |
| कहति | कहती है | says |
| कछु | कुछ | anything |
| जागति | जागती हुई | awake |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मसानु | श्मशान | a cremation ground |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 36
- स्रोत अभिलेख
- 2.36
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 373, 374
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