अयोध्याकाण्ड · दोहा 83 · दोहा/सोरठा
हय गय कोटिन्ह केलिमृग पुरपसु चातक मोर।
हय गय कोटिन्ह केलिमृग पुरपसु चातक मोर।
पिक रथांग सुक सारिका सारस हंस चकोर।।83।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.83 · पुस्तक पृ. 412, 412
भावार्थ और शब्दार्थ
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1हय गय कोटिन्ह केलिमृग पुरपसु चातक मोर।
घोड़े, हाथी, करोड़ों पाले हुए क्रीड़ामृग, नगर के पशु, चातक और मोर—
English explanation
Horses, elephants, countless pet deer kept for pleasure, the city’s animals, rain-calling cuckoos, and peacocks—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हय | घोड़े | horses |
| गय | हाथी | elephants |
| कोटिन्ह | करोड़ों | in tens of millions; countless |
| केलिमृग | मनोरंजन के लिए पाले हुए हिरण | pet deer kept for pleasure |
| पुरपसु | नगर के पशु | the city’s animals |
| चातक | चातक पक्षी | rain-calling cuckoos |
| मोर | मोर | peacocks |
2 पिक रथांग सुक सारिका सारस हंस चकोर।।83।।
कोयल, चक्रवाक, तोते, मैना, सारस, हंस और चकोर।
English explanation
Cuckoos, ruddy shelducks, parrots, mynas, cranes, swans, and chukar partridges.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पिक | कोयल | cuckoos |
| रथांग | चक्रवाक पक्षी | ruddy shelducks |
| सुक | तोते | parrots |
| सारिका | मैना | mynas |
| सारस | सारस पक्षी | cranes |
| हंस | हंस | swans |
| चकोर | चकोर पक्षी | chukar partridges |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 83
- स्रोत अभिलेख
- 2.83
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 412, 412
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