अयोध्याकाण्ड · दोहा 82 · दोहा/सोरठा
-पाइ रजायसु नाइ सिरु रथु अति बेग बनाइ।
-पाइ रजायसु नाइ सिरु रथु अति बेग बनाइ।
गयउ जहाँ बाहेर नगर सीय सहित दोउ भाइ।।82।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.82 · पुस्तक पृ. 411, 412
भावार्थ और शब्दार्थ
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1-पाइ रजायसु नाइ सिरु रथु अति बेग बनाइ।
राजा की आज्ञा पाकर, सिर झुकाकर और रथ बहुत जल्दी तैयार करके,
English explanation
Having received the king’s command, bowed his head, and readied the chariot very quickly,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाइ | पाकर | having received |
| रजायसु | राजा की आज्ञा | the king’s command |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| सिरु | सिर | his head |
| रथु | रथ | the chariot |
| अति | बहुत | very |
| बेग | शीघ्र | quickly |
| बनाइ | तैयार करके | having readied |
2 गयउ जहाँ बाहेर नगर सीय सहित दोउ भाइ।।82।।
सुमंत्र वहाँ गए जहाँ नगर के बाहर सीता सहित दोनों भाई थे।
English explanation
Sumantra went to where the two brothers were with Sita, outside the city.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गयउ | गए | went |
| जहाँ | जहाँ | where |
| बाहेर | बाहर | outside |
| नगर | नगर के | the city |
| सीय | सीता | Sita |
| सहित | के साथ | with |
| दोउ | दोनों | both |
| भाइ | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 82
- स्रोत अभिलेख
- 2.82
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 411, 412
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