अयोध्याकाण्ड · दोहा 81 · दोहा/सोरठा
-सुठि सुकुमार कुमार दोउ जनकसुता सुकुमारि।
-सुठि सुकुमार कुमार दोउ जनकसुता सुकुमारि।
रथ चढ़ाइ देखराइ बनु फिरेहु गएँ दिन चारि।।81।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.81 · पुस्तक पृ. 410, 411
भावार्थ और शब्दार्थ
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1-सुठि सुकुमार कुमार दोउ जनकसुता सुकुमारि।
दोनों राजकुमार अत्यंत सुकुमार हैं और जनक की पुत्री सीता भी सुकुमारी हैं।
English explanation
Both princes are very delicate, and Janaka’s daughter Sita is delicate too.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुठि | बहुत | very |
| सुकुमार | कोमल; सुकुमार | delicate |
| कुमार | राजकुमार राम और लक्ष्मण | the princes Rama and Lakshmana |
| दोउ | दोनों | both |
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| सुकुमारि | कोमल; सुकुमारी | delicate |
2 रथ चढ़ाइ देखराइ बनु फिरेहु गएँ दिन चारि।।81।।
उन्हें रथ पर चढ़ाकर वन दिखाना और चार दिन बीतने पर लौट आना।
English explanation
Seat them in the chariot, show them the forest, and return after four days have passed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रथ | रथ पर | in the chariot |
| चढ़ाइ | उन्हें चढ़ाकर | having seated them |
| देखराइ | दिखाकर | having shown them |
| बनु | वन | the forest |
| फिरेहु | लौट आना | return |
| गएँ | बीतने पर | after have passed |
| दिन | दिन | days |
| चारि | चार | four |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 81
- स्रोत अभिलेख
- 2.81
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 410, 411
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