अयोध्याकाण्ड · दोहा 194 · दोहा/सोरठा
स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर कोल किरात।
स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर कोल किरात।
रामु कहत पावन परम होत भुवन बिख्यात।।194।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.194 · पुस्तक पृ. 504, 504
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर कोल किरात।
श्वपच, शबर, खस, यवन, जड़ और पामर लोग, तथा कोल और किरात—
English explanation
Those termed dog-eaters, Shabaras, Khasas, Yavanas, the ignorant and lowly, and the Kola and Kirata peoples—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वपच | श्वपच; कुत्ते का मांस पकाने वाले कहे गए लोग | people termed dog-cookers or dog-eaters |
| सबर | शबर समुदाय के लोग | people of the Shabara community |
| खस | खस समुदाय के लोग | people of the Khasa community |
| जमन | यवन कहे गए लोग | people termed Yavanas |
| जड़ | अज्ञानी; बुद्धिहीन कहे गए लोग | the ignorant; those deemed dull |
| पावँर | पामर; अधम या असंस्कृत कहे गए लोग | those deemed lowly or uncultivated |
| कोल | कोल समुदाय के लोग | people of the Kola community |
| किरात | किरात समुदाय के लोग | people of the Kirata community |
2 रामु कहत पावन परम होत भुवन बिख्यात।।194।।
‘राम’ कहते ही ये सभी परम पवित्र हो जाते हैं—यह बात संसार में प्रसिद्ध है।
English explanation
By uttering “Rama,” all these become supremely pure—this is renowned throughout the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | श्रीराम का नाम ‘राम’ | Rama’s name, “Rama” |
| कहत | कहने से; उच्चारण करते ही | by saying; upon uttering |
| पावन | पवित्र | pure |
| परम | अत्यंत; सर्वोच्च रूप से | supremely; exceedingly |
| होत | हो जाते हैं | become |
| भुवन | संसार में | in the world |
| बिख्यात | प्रसिद्ध; सर्वविदित | renowned; widely known |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 194
- स्रोत अभिलेख
- 2.194
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 504, 504
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।