अयोध्याकाण्ड · दोहा 195 · दोहा/सोरठा
समुझि मोरि करतूति कुलु प्रभु महिमा जियँ जोइ।
समुझि मोरि करतूति कुलु प्रभु महिमा जियँ जोइ।
जो न भजइ रघुबीर पद जग बिधि बंचित सोइ।।195।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.195 · पुस्तक पृ. 505, 505
भावार्थ और शब्दार्थ
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1समुझि मोरि करतूति कुलु प्रभु महिमा जियँ जोइ।
मेरे कर्म और कुल को समझकर तथा हृदय में प्रभु की महिमा पर विचार करके—
English explanation
Having considered my deeds and lineage, and reflected in the heart on the Lord’s greatness—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | समझकर | having considered |
| मोरि | मेरे | my |
| करतूति | कर्म और आचरण | deeds and conduct |
| कुलु | कुल और वंश | family and lineage |
| प्रभु | प्रभु राम की | of Lord Rama |
| महिमा | महिमा | greatness |
| जियँ | हृदय में | in the heart |
| जोइ | विचार करके | having contemplated |
2 जो न भजइ रघुबीर पद जग बिधि बंचित सोइ।।195।।
जो रघुवीर के चरणों का भजन नहीं करता, वही संसार में विधाता द्वारा वंचित है।
English explanation
Whoever does not worship Rama’s feet is indeed one deprived by the Creator in this world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| न | नहीं | does not |
| भजइ | भजता या उपासना करता | worships or reveres |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम के | of Rama, hero of Raghu’s lineage |
| पद | चरणों को | the feet |
| जग | संसार में | in the world |
| बिधि | विधाता द्वारा | by the Creator |
| बंचित | वंचित | deprived |
| सोइ | वही व्यक्ति | that very person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 195
- स्रोत अभिलेख
- 2.195
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 505, 505
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