अयोध्याकाण्ड · दोहा 196 · दोहा/सोरठा
सनकारे सेवक सकल चले स्वामि रुख पाइ।
सनकारे सेवक सकल चले स्वामि रुख पाइ।
घर तरु तर सर बाग बन बास बनाएन्हि जाइ।।196।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.196 · पुस्तक पृ. 505, 506
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सनकारे सेवक सकल चले स्वामि रुख पाइ।
उसने सभी सेवकों को संकेत किया; वे अपने स्वामी का अभिप्राय समझकर चल पड़े।
English explanation
He signaled all the servants, who set out upon understanding their master's wishes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सनकारे | संकेत किया | signaled |
| सेवक | सेवकों को | the servants |
| सकल | सभी | all |
| चले | चल पड़े | set out |
| स्वामि | स्वामी का | their master's |
| रुख | अभिप्राय; इच्छा | intention; wishes |
| पाइ | समझकर | having understood |
2 घर तरु तर सर बाग बन बास बनाएन्हि जाइ।।196।।
उन्होंने जाकर घरों में, पेड़ों के नीचे, सरोवरों के पास, बागों और वनों में ठहरने के स्थान बनाए।
English explanation
They went and prepared lodging in houses, beneath trees, by ponds, and in gardens and woods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घर | घरों में | in houses |
| तरु | पेड़ों के | trees |
| तर | नीचे | beneath |
| सर | सरोवरों के पास | by ponds |
| बाग | बागों में | in gardens |
| बन | वनों में | in woods |
| बास | ठहरने के स्थान | lodgings |
| बनाएन्हि | उन्होंने बनाए | they prepared |
| जाइ | जाकर | having gone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 196
- स्रोत अभिलेख
- 2.196
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 505, 506
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।