अयोध्याकाण्ड · दोहा 197 · दोहा/सोरठा
एहि बिधि मज्जनु भरतु करि गुर अनुसासन पाइ।
एहि बिधि मज्जनु भरतु करि गुर अनुसासन पाइ।
मातु नहानीं जानि सब डेरा चले लवाइ।।197।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.197 · पुस्तक पृ. 506, 507
भावार्थ और शब्दार्थ
1एहि बिधि मज्जनु भरतु करि गुर अनुसासन पाइ।
इस प्रकार स्नान करके भरत ने गुरु की आज्ञा पाई; आगे की पंक्ति में उनके डेरे की ओर जाने का वर्णन है।
English explanation
Having bathed in this manner, Bharata received his guru’s instructions; the following line continues with his departure for camp.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| मज्जनु | स्नान | bathing |
| भरतु | भरत ने | Bharata |
| करि | करके | having performed |
| गुर | गुरु की | the guru’s |
| अनुसासन | आज्ञा | instructions |
| पाइ | पाकर | having received |
2 मातु नहानीं जानि सब डेरा चले लवाइ।।197।।
सभी माताओं का स्नान हो चुका जानकर, भरत उन्हें साथ ले डेरे की ओर चले।
English explanation
Knowing that all the mothers had finished bathing, Bharata took them along and proceeded to camp.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माताएँ | the mothers |
| नहानीं | स्नान कर चुकी थीं | had finished bathing |
| जानि | जानकर | knowing |
| सब | सभी | all |
| डेरा | डेरे की ओर | to camp |
| चले | चले | proceeded |
| लवाइ | साथ ले जाकर | taking them along |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 197
- स्रोत अभिलेख
- 2.197
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 506, 507
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।