अयोध्याकाण्ड · दोहा 193 · दोहा/सोरठा
करत दंडवत देखि तेहि भरत लीन्ह उर लाइ।
करत दंडवत देखि तेहि भरत लीन्ह उर लाइ।
मनहुँ लखन सन भेंट भइ प्रेम न हृदयँ समाइ।।193।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.193 · पुस्तक पृ. 503, 503
भावार्थ और शब्दार्थ
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1करत दंडवत देखि तेहि भरत लीन्ह उर लाइ।
उन्हें दंडवत करते देखकर भरत ने उन्हें हृदय से लगा लिया।
English explanation
Seeing Guha prostrating himself, Bharata clasped him to his breast.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते हुए | performing |
| दंडवत | दंडवत प्रणाम | a full-length prostration |
| देखि | देखकर | seeing |
| तेहि | उन्हें; गुह को | him; Guha |
| भरत | भरत ने; राम के भाई ने | Bharata, Rama’s brother |
| लीन्ह | ले लिया | took; clasped |
| उर | छाती से; हृदय से | to his breast |
| लाइ | लगाकर | holding close |
2 मनहुँ लखन सन भेंट भइ प्रेम न हृदयँ समाइ।।193।।
मानो लक्ष्मण से भेंट हुई हो; भरत का प्रेम हृदय में समा नहीं रहा था।
English explanation
It was as though Bharata had met Lakshmana; his heart could not contain his love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहुँ | मानो; जैसे | as though |
| लखन | लक्ष्मण; राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| सन | से; के साथ | with |
| भेंट | मुलाकात | a meeting |
| भइ | हुई | had occurred |
| प्रेम | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| समाइ | समाता है; समा पाता है | fits; can be contained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 193
- स्रोत अभिलेख
- 2.193
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 503, 503
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