अयोध्याकाण्ड · दोहा 192 · दोहा/सोरठा
गहहु घाट भट समिटि सब लेउँ मरम मिलि जाइ।
गहहु घाट भट समिटि सब लेउँ मरम मिलि जाइ।
बूझि मित्र अरि मध्य गति तस तब करिहउँ आइ।।192।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.192 · पुस्तक पृ. 502, 503
भावार्थ और शब्दार्थ
1गहहु घाट भट समिटि सब लेउँ मरम मिलि जाइ।
हे योद्धाओ, सब एकत्र होकर घाटों पर डटे रहो; मैं जाकर भरत से मिलकर उनका अभिप्राय जान लूँ।
English explanation
Warriors, gather together and hold the river landings; I will go meet Bharata and learn his intention.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहहु | अपने अधिकार में रखो | hold, secure |
| घाट | नदी के घाटों को | the river landings |
| भट | हे योद्धाओ | O warriors |
| समिटि | एकत्र होकर | having gathered |
| सब | सब | all |
| लेउँ | मैं जान लूँ | let me ascertain |
| मरम | भीतरी अभिप्राय | the true intention |
| मिलि | मिलकर | by meeting him |
| जाइ | जाकर | having gone |
2 बूझि मित्र अरि मध्य गति तस तब करिहउँ आइ।।192।।
उनका भाव मित्र का है, शत्रु का है या तटस्थ का—यह समझकर फिर लौटकर उसी के अनुसार कार्य करूँगा।
English explanation
After determining whether his disposition is friendly, hostile, or neutral, I will return and act accordingly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूझि | समझकर | having determined |
| मित्र | मित्र | friend |
| अरि | शत्रु | enemy |
| मध्य | तटस्थ | neutral |
| गति | भाव या स्थिति | disposition or stance |
| तस | उसी के अनुसार | accordingly |
| तब | तब | then |
| करिहउँ | मैं कार्य करूँगा | I will act |
| आइ | लौटकर | upon returning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 192
- स्रोत अभिलेख
- 2.192
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 502, 503
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।