अयोध्याकाण्ड · दोहा 191 · दोहा/सोरठा
भाइहु लावहु धोख जनि आजु काज बड़ मोहि।
भाइहु लावहु धोख जनि आजु काज बड़ मोहि।
सुनि सरोष बोले सुभट बीर अधीर न होहि।।191।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.191 · पुस्तक पृ. 501, 502
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भाइहु लावहु धोख जनि आजु काज बड़ मोहि।
हे भाइयो, मुझे धोखे में न डालना; आज मेरे सामने बड़ा कार्य है।
English explanation
Brothers, do not let me down; today I have a great task before me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाइहु | हे भाइयो | O brothers |
| लावहु | डालो; होने दो | bring about; let happen |
| धोख | धोखा या विश्वासघात | deception or betrayal |
| जनि | मत | do not |
| आजु | आज | today |
| काज | कार्य | task |
| बड़ | बड़ा, महत्त्वपूर्ण | great; important |
| मोहि | मेरे लिए; मुझे | for me; to me |
2 सुनि सरोष बोले सुभट बीर अधीर न होहि।।191।।
यह सुनकर योद्धा रोषपूर्वक बोले, ‘हे वीर, अधीर मत हो।’
English explanation
Hearing this, the warriors spoke indignantly: “Brave chief, do not lose composure.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सरोष | रोष सहित | indignantly |
| बोले | बोले | said |
| सुभट | वीर योद्धा | valiant warriors |
| बीर | हे वीर | O brave chief |
| अधीर | व्याकुल या धैर्यहीन | agitated or impatient |
| न | मत | not |
| होहि | होओ | become |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 191
- स्रोत अभिलेख
- 2.191
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 501, 502
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।