अयोध्याकाण्ड · दोहा 159 · दोहा/सोरठा
सुनि सुत बचन सनेहमय कपट नीर भरि नैन।
सुनि सुत बचन सनेहमय कपट नीर भरि नैन।
भरत श्रवन मन सूल सम पापिनि बोली बैन।।159।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.159 · पुस्तक पृ. 475, 476
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुनि सुत बचन सनेहमय कपट नीर भरि नैन।
पुत्र के स्नेहभरे वचन सुनकर कैकेयी ने छल से आँखों में आँसू भर लिए।
English explanation
Hearing her son’s affectionate words, Kaikeyi deceitfully filled her eyes with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सुत | पुत्र के | her son’s |
| बचन | वचन | words |
| सनेहमय | स्नेह से भरे | full of affection |
| कपट | छल से | deceitfully |
| नीर | आँसू | tears |
| भरि | भरकर | filling |
| नैन | आँखों में | her eyes |
2 भरत श्रवन मन सूल सम पापिनि बोली बैन।।159।।
उस पापिनी ने ऐसे वचन कहे जो भरत के कानों और मन में शूल जैसे चुभने वाले थे।
English explanation
The sinful woman spoke words that pierced Bharata’s ears and heart like a sharp spike.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| श्रवन | कानों में | to his ears |
| मन | मन में | to his heart |
| सूल | शूल | a sharp spike |
| सम | के समान | like |
| पापिनि | पाप करने वाली कैकेयी | the sinful Kaikeyi |
| बोली | बोली | spoke |
| बैन | वचन | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 159
- स्रोत अभिलेख
- 2.159
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 475, 476
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