अयोध्याकाण्ड · दोहा 9 · दोहा/सोरठा
सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि प्रसंस।
सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि प्रसंस।
राम कस न तुम्ह कहहु अस हंस बंस अवतंस।।9।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.9 · पुस्तक पृ. 350, 351
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि प्रसंस।
स्नेह से सने वचन सुनकर मुनि वसिष्ठ ने राम की प्रशंसा की।
English explanation
Hearing these words steeped in affection, the sage Vasishtha praised Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सनेह | स्नेह से | with affection |
| साने | सने हुए | steeped |
| बचन | वचन | words |
| मुनि | मुनि वसिष्ठ ने | the sage Vasishtha |
| रघुबरहि | रघुकुल के श्रेष्ठ राम को | Rama, the foremost of the Raghu lineage |
| प्रसंस | सराहा | praised |
2 राम कस न तुम्ह कहहु अस हंस बंस अवतंस।।9।।
हे राम, सूर्यवंश के भूषण, तुम ऐसा क्यों न कहो!
English explanation
Rama, ornament of the solar lineage, why would you not speak thus!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | हे राम | O Rama |
| कस | क्यों | why |
| न | नहीं | not |
| तुम्ह | तुम | you |
| कहहु | कहो | speak |
| अस | ऐसा | thus |
| हंस | सूर्य | the sun |
| बंस | वंश के | of the lineage |
| अवतंस | भूषण | ornament; glory |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 9
- स्रोत अभिलेख
- 2.9
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 350, 351
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