अयोध्याकाण्ड · दोहा 8 · दोहा/सोरठा
राम राज अभिषेकु सुनि हियँ हरषे नर नारि।
राम राज अभिषेकु सुनि हियँ हरषे नर नारि।
लगे सुमंगल सजन सब बिधि अनुकूल बिचारि।।8।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.8 · पुस्तक पृ. 349, 350
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1राम राज अभिषेकु सुनि हियँ हरषे नर नारि।
राम के राज्याभिषेक का समाचार सुनकर स्त्री-पुरुष हृदय में आनंदित हुए।
English explanation
On hearing of Rama’s royal consecration, men and women rejoiced in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम का | Rama’s |
| राज | राजकीय | royal |
| अभिषेकु | राजतिलक या अभिषेक | consecration or coronation |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| हरषे | आनंदित हुए | rejoiced |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
2 लगे सुमंगल सजन सब बिधि अनुकूल बिचारि।।8।।
विधाता को अनुकूल समझकर सब शुभ मंगल की तैयारियाँ करने लगे।
English explanation
Believing Providence to be favorable, everyone began making auspicious preparations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लगे | लग गए | began |
| सुमंगल | शुभ मंगल की तैयारियाँ | auspicious preparations |
| सजन | सजाने या तैयार करने | to arrange or prepare |
| सब | सब लोग | everyone |
| बिधि | विधाता को | Providence, the ordainer of fate |
| अनुकूल | अनुकूल | favorable |
| बिचारि | समझकर | considering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 8
- स्रोत अभिलेख
- 2.8
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 349, 350
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।