अयोध्याकाण्ड · दोहा 7 · दोहा/सोरठा
एहि अवसर मंगलु परम सुनि रहँसेउ रनिवासु।
एहि अवसर मंगलु परम सुनि रहँसेउ रनिवासु।
सोभत लखि बिधु बढ़त जनु बारिधि बीचि बिलासु।।7।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.7 · पुस्तक पृ. 349, 349
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एहि अवसर मंगलु परम सुनि रहँसेउ रनिवासु।
इस अवसर पर अत्यंत मंगलमय समाचार सुनकर रानियों का अंतःपुर आनंदित हो उठा।
English explanation
At this time, hearing the supremely auspicious news, the queens’ household rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| अवसर | अवसर पर | at the time |
| मंगलु | मंगलमय समाचार | auspicious news |
| परम | अत्यंत | supremely |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रहँसेउ | आनंदित हो उठा | rejoiced |
| रनिवासु | रानियों का अंतःपुर और वहाँ के लोग | the queens’ household |
2 सोभत लखि बिधु बढ़त जनु बारिधि बीचि बिलासु।।7।।
वह ऐसा शोभायमान था, मानो चंद्रमा को देखकर समुद्र की लहरों का उल्लास बढ़ रहा हो।
English explanation
It shone as though, at the sight of the moon, the ocean’s waves were growing more exuberant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोभत | शोभायमान था | shone beautifully |
| लखि | देखकर | on seeing |
| बिधु | चंद्रमा को | the moon |
| बढ़त | बढ़ रहा हो | was increasing |
| जनु | मानो | as though |
| बारिधि | समुद्र की | the ocean’s |
| बीचि | लहरों का | of the waves |
| बिलासु | उल्लास, चंचल क्रीड़ा | exuberance, playful movement |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 7
- स्रोत अभिलेख
- 2.7
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 349, 349
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