अयोध्याकाण्ड · दोहा 6 · दोहा/सोरठा
ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग रथ नाग।
ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग रथ नाग।
सिर धरि मुनिबर बचन सबु निज निज काजहिं लाग।।6।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.6 · पुस्तक पृ. 348, 348
भावार्थ और शब्दार्थ
1ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग रथ नाग।
‘ध्वज, पताकाएँ, तोरण और कलश सजाओ; घोड़ों, रथों और हाथियों को भी सज्जित करो।’
English explanation
“Arrange flags, banners, festoons, and ceremonial pots; adorn the horses, chariots, and elephants as well.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ध्वज | ध्वज | flags |
| पताक | पताकाएँ | banners |
| तोरन | तोरण | decorative gateway festoons |
| कलस | कलश | ceremonial pots |
| सजहु | सजाओ | arrange and adorn |
| तुरग | घोड़े | horses |
| रथ | रथ | chariots |
| नाग | हाथी | elephants |
2 सिर धरि मुनिबर बचन सबु निज निज काजहिं लाग।।6।।
मुनिश्रेष्ठ के वचनों को आदरपूर्वक सिर पर धारण करके सब अपने-अपने काम में लग गए।
English explanation
Respectfully accepting the eminent sage’s words, everyone set about their respective tasks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिर | सिर पर | on the head |
| धरि | धारण करके | having received |
| मुनिबर | मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ के | of the eminent sage Vashishtha |
| बचन | वचन | words |
| सबु | सब लोग | everyone |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने | respective |
| काजहिं | काम में | at their tasks |
| लाग | लग गए | set about |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 6
- स्रोत अभिलेख
- 2.6
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 348, 348
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।