अयोध्याकाण्ड · दोहा 5 · दोहा/सोरठा
कहेउ भूप मुनिराज कर जोइ जोइ आयसु होइ।
कहेउ भूप मुनिराज कर जोइ जोइ आयसु होइ।
राम राज अभिषेक हित बेगि करहु सोइ सोइ।।5।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.5 · पुस्तक पृ. 347, 348
भावार्थ और शब्दार्थ
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1कहेउ भूप मुनिराज कर जोइ जोइ आयसु होइ।
राजा ने कहा, ‘मुनिराज वसिष्ठ की जो-जो आज्ञा हो—’
English explanation
The king said, “Whatever instructions the chief sage Vashishtha gives—”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउ | कहा | said |
| भूप | राजा ने | the king |
| मुनिराज | मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ | Vashishtha, the chief sage |
| कर | की | of |
| जोइ | जो भी | whatever |
| जोइ | जो भी | each such |
| आयसु | आज्ञा | instruction |
| होइ | हो | may be |
2 राम राज अभिषेक हित बेगि करहु सोइ सोइ।।5।।
‘राम के राज्याभिषेक के लिए वह सब शीघ्र कीजिए।’
English explanation
“Carry out all of them promptly for Rama’s royal consecration.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| राज | राज्य का | royal |
| अभिषेक | अभिषेक | consecration |
| हित | के लिए | for |
| बेगि | शीघ्र | promptly |
| करहु | कीजिए | carry out |
| सोइ | वही | those very things |
| सोइ | सब | each one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 5
- स्रोत अभिलेख
- 2.5
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 347, 348
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