अयोध्याकाण्ड · दोहा 4 · दोहा/सोरठा
बेगि बिलंबु न करिअ नृप साजिअ सबुइ समाजु।
बेगि बिलंबु न करिअ नृप साजिअ सबुइ समाजु।
सुदिन सुमंगलु तबहिं जब रामु होहिं जुबराजु।।4।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.4 · पुस्तक पृ. 346, 347
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बेगि बिलंबु न करिअ नृप साजिअ सबुइ समाजु।
हे राजा, शीघ्र कीजिए, विलंब न कीजिए; सारी तैयारी जुटाइए।
English explanation
O king, act quickly; do not delay. Arrange all the preparations.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| बिलंबु | विलंब | delay |
| न | न | not |
| करिअ | कीजिए | make |
| नृप | हे राजा | O king |
| साजिअ | तैयार कीजिए | arrange |
| सबुइ | समस्त | all |
| समाजु | आयोजन की सामग्री और व्यवस्था | materials and arrangements for the ceremony |
2 सुदिन सुमंगलु तबहिं जब रामु होहिं जुबराजु।।4।।
शुभ दिन और उत्तम मंगल तभी होगा, जब राम युवराज होंगे।
English explanation
It will be a blessed day and a truly auspicious occasion when Rama becomes crown prince.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुदिन | शुभ दिन | a blessed day |
| सुमंगलु | उत्तम मंगल | a most auspicious occasion |
| तबहिं | तभी | only then |
| जब | जब | when |
| रामु | राम | Rama |
| होहिं | होंगे | becomes |
| जुबराजु | युवराज | crown prince |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 4
- स्रोत अभिलेख
- 2.4
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 346, 347
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।