अयोध्याकाण्ड · दोहा 3 · दोहा/सोरठा
राजन राउर नामु जसु सब अभिमत दातार।
राजन राउर नामु जसु सब अभिमत दातार।
फल अनुगामी महिप मनि मन अभिलाषु तुम्हार।।3।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.3 · पुस्तक पृ. 345, 346
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1राजन राउर नामु जसु सब अभिमत दातार।
हे राजन्, आपका नाम और यश सभी मनोवांछित वस्तुओं को देने वाले हैं।
English explanation
O king, your name and fame bestow all that one desires.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजन | हे राजा | O king |
| राउर | आपका | your |
| नामु | नाम | name |
| जसु | यश | fame |
| सब | सभी | all |
| अभिमत | मनचाही वस्तुओं के | desired things |
| दातार | देने वाले | bestowers of |
2 फल अनुगामी महिप मनि मन अभिलाषु तुम्हार।।3।।
हे राजाओं में मणि, फल तो आपके मन की अभिलाषा के पीछे-पीछे आता है।
English explanation
O jewel among kings, fulfillment follows the desire of your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फल | फल या सिद्धि | result or fulfillment |
| अनुगामी | पीछे चलने वाला है | follows after |
| महिप | राजाओं में | among kings |
| मनि | हे मणि-तुल्य श्रेष्ठ राजा | O foremost jewel |
| मन | मन की | of the heart |
| अभिलाषु | अभिलाषा | desire |
| तुम्हार | आपकी | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 3
- स्रोत अभिलेख
- 2.3
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 345, 346
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