अयोध्याकाण्ड · दोहा 10 · दोहा/सोरठा
तेहि अवसर आए लखन मगन प्रेम आनंद।
तेहि अवसर आए लखन मगन प्रेम आनंद।
सनमाने प्रिय बचन कहि रघुकुल कैरव चंद।।10।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 351, 352
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तेहि अवसर आए लखन मगन प्रेम आनंद।
उसी समय लक्ष्मण प्रेम और आनंद में मग्न होकर आए।
English explanation
At that moment Lakshmana arrived, absorbed in love and joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसी | that very |
| अवसर | समय | moment |
| आए | आए | arrived |
| लखन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| मगन | मग्न | absorbed |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| आनंद | आनंद में | in joy |
2 सनमाने प्रिय बचन कहि रघुकुल कैरव चंद।।10।।
रघुकुलरूपी कुमुद के चंद्रमा राम ने प्रिय वचन कहकर लक्ष्मण का सम्मान किया।
English explanation
Rama, the moon to the night-blooming lotus of Raghu’s lineage, welcomed Lakshmana with affectionate words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सनमाने | सम्मान किया | honored; welcomed |
| प्रिय | प्रिय; स्नेहभरे | affectionate |
| बचन | वचन | words |
| कहि | कहकर | having spoken |
| रघुकुल | रघु का वंश | Raghu’s lineage |
| कैरव | कुमुद; रात में खिलने वाला कमल | night-blooming water lily |
| चंद | चंद्रमा; यहाँ राम | the moon; here, Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 10
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 351, 352
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