अयोध्याकाण्ड · दोहा 11 · दोहा/सोरठा
बिपति हमारि बिलोकि बड़ि मातु करिअ सोइ आजु।
बिपति हमारि बिलोकि बड़ि मातु करिअ सोइ आजु।
रामु जाहिं बन राजु तजि होइ सकल सुरकाजु।।11।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.11 · पुस्तक पृ. 352, 353
भावार्थ और शब्दार्थ
1बिपति हमारि बिलोकि बड़ि मातु करिअ सोइ आजु।
हे माता, हमारी बड़ी विपत्ति देखकर आज वही कीजिए जिससे राम राज्य छोड़कर वन जाएँ और देवताओं के सारे कार्य पूरे हों।
English explanation
Mother, seeing our great distress, act today so that Rama leaves the kingdom for the forest and all the gods' purposes are accomplished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिपति | विपत्ति | distress |
| हमारि | हमारी | our |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| बड़ि | बड़ी | great |
| मातु | हे माता | O Mother |
| करिअ | कीजिए | please do |
| सोइ | वही उपाय | that very action |
| आजु | आज | today |
2 रामु जाहिं बन राजु तजि होइ सकल सुरकाजु।।11।।
राम राज्य छोड़कर वन जाएँ और देवताओं के सभी कार्य पूरे हों।
English explanation
May Rama leave the kingdom and go to the forest, and may all the gods' purposes be accomplished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| जाहिं | जाएँ | may go |
| बन | वन में | to the forest |
| राजु | राज्य | the kingdom |
| तजि | छोड़कर | having relinquished |
| होइ | पूरे हों | may be accomplished |
| सकल | सभी | all |
| सुरकाजु | देवताओं के कार्य | the gods' purposes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 11
- स्रोत अभिलेख
- 2.11
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 352, 353
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।