अयोध्याकाण्ड · दोहा 12 · दोहा/सोरठा
नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकेइ केरि।
नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकेइ केरि।
अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि।।12।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.12 · पुस्तक पृ. 353, 353
भावार्थ और शब्दार्थ
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1नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकेइ केरि।
कैकेयी की मंदबुद्धि दासी का नाम मंथरा था।
English explanation
Kaikeyi’s dull-witted maid was named Manthara.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नामु | नाम | name |
| मंथरा | मंथरा नाम की दासी | Manthara, the maid |
| मंदमति | मंदबुद्धि | dull-witted |
| चेरी | दासी | maidservant |
| कैकेइ | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
| केरि | की | belonging to |
2 अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि।।12।।
सरस्वती उसकी बुद्धि पलटकर उसे अपयश की पेटारी बनाकर चली गईं।
English explanation
Saraswati departed after turning her mind and making her a repository of infamy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अजस | अपयश की | of infamy |
| पेटारी | पेटारी | a repository |
| ताहि | उसे | her |
| करि | बनाकर | having made |
| गई | चली गईं | departed |
| गिरा | वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech |
| मति | बुद्धि | her mind |
| फेरि | पलटकर | having turned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 12
- स्रोत अभिलेख
- 2.12
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 353, 353
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