अयोध्याकाण्ड · दोहा 232 · दोहा/सोरठा
सुनि रघुबर बानी बिबुध देखि भरत पर हेतु।
सुनि रघुबर बानी बिबुध देखि भरत पर हेतु।
सकल सराहत राम सो प्रभु को कृपानिकेतु।।232।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.232 · पुस्तक पृ. 536, 537
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनि रघुबर बानी बिबुध देखि भरत पर हेतु।
श्रीराम की वाणी सुनकर और भरत के प्रति उनका प्रेम देखकर देवता—
English explanation
Hearing Rama's words and seeing his affection for Bharata, the gods—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ श्रीराम की | of Rama, foremost of Raghu's lineage |
| बानी | वाणी | words |
| बिबुध | देवता | the gods |
| देखि | देखकर | having seen |
| भरत | भरत | Bharata |
| पर | के प्रति | toward |
| हेतु | प्रेम, स्नेह | love; affection |
2 सकल सराहत राम सो प्रभु को कृपानिकेतु।।232।।
सभी उनकी सराहना करने लगे: राम जैसा कृपा का धाम स्वामी और कौन है?
English explanation
All praised him: who else is a lord like Rama, an abode of compassion?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी देवता | all the gods |
| सराहत | सराहते हैं | praise |
| राम | श्रीराम | Rama |
| सो | जैसा | like |
| प्रभु | स्वामी | lord |
| को | कौन | who |
| कृपानिकेतु | कृपा का धाम | an abode of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 232
- स्रोत अभिलेख
- 2.232
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका लक्ष्मणजीको समझाना एवं भरतजीकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 536, 537
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