अयोध्याकाण्ड · दोहा 231 · दोहा/सोरठा
भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ।।
भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ।।
कबहुँ कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिनसाइ।।231।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.231 · पुस्तक पृ. 535, 536
भावार्थ और शब्दार्थ
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1भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ।।
ब्रह्मा, विष्णु और शिव का पद पा लेने पर भी भरत को राजमद नहीं होगा।
English explanation
Even on attaining the stations of Brahma, Vishnu, and Shiva, Bharata would not become intoxicated with power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतहि | भरत को | to Bharata |
| होइ | होगा | would arise |
| न | नहीं | not |
| राजमदु | राजसत्ता का मद | intoxication of royal power |
| बिधि | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| हरि | विष्णु | Vishnu, the preserver |
| हर | शिव | Shiva |
| पद | पद; अधिकार-स्थान | stations; positions of authority |
| पाइ | पाकर भी | even upon attaining |
2 कबहुँ कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिनसाइ।।231।।
क्या काँजी की कुछ बूँदों से कभी क्षीरसागर बिगड़ सकता है?
English explanation
Could a few drops of sour gruel ever spoil the ocean of milk?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहुँ | कभी | ever |
| कि | क्या | could; question marker |
| काँजी | काँजी; खट्टा किण्वित पेय | sour fermented gruel |
| सीकरनि | बूँदों से | by drops |
| छीरसिंधु | क्षीरसागर; दूध का समुद्र | the ocean of milk |
| बिनसाइ | बिगड़ जाता है | be spoiled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 231
- स्रोत अभिलेख
- 2.231
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 535, 536
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