अयोध्याकाण्ड · दोहा 230 · दोहा/सोरठा
अति सरोष माखे लखनु लखि सुनि सपथ प्रवान।
अति सरोष माखे लखनु लखि सुनि सपथ प्रवान।
सभय लोक सब लोकपति चाहत भभरि भगान।।230।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.23 · पुस्तक पृ. 535, 535
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अति सरोष माखे लखनु लखि सुनि सपथ प्रवान।
लक्ष्मण को अत्यंत रोष से तमतमाया देखकर और उनकी दृढ़ शपथ सुनकर—
English explanation
Seeing Lakshmana fiercely enraged and hearing his solemn oath—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | extremely |
| सरोष | रोष से भरे | filled with wrath |
| माखे | तमतमाए; क्रुद्ध हुए | enraged; bristling with anger |
| लखनु | लक्ष्मण को | Lakshmana |
| लखि | देखकर | having seen |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सपथ | शपथ | oath |
| प्रवान | दृढ़; विश्वसनीय | solemn; credible |
2 सभय लोक सब लोकपति चाहत भभरि भगान।।230।।
सभी लोकों के लोग और लोकपाल भयभीत होकर घबराहट में भागना चाहने लगे।
English explanation
The inhabitants of all the worlds and their guardians grew afraid and wished to flee in panic.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सभय | भयभीत | afraid |
| लोक | लोकों के लोग | the inhabitants of the worlds |
| सब | सभी | all |
| लोकपति | लोकों के अधिपति; लोकपाल | rulers or guardians of the worlds |
| चाहत | चाहते थे | wished |
| भभरि | घबराकर | in panic |
| भगान | भागना | to flee |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 230
- स्रोत अभिलेख
- 2.23
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 535, 535
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