अयोध्याकाण्ड · दोहा 87 · दोहा/सोरठा
सुध्द सचिदानंदमय कंद भानुकुल केतु।
सुध्द सचिदानंदमय कंद भानुकुल केतु।
चरित करत नर अनुहरत संसृति सागर सेतु।।87।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.87 · पुस्तक पृ. 415, 416
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुध्द सचिदानंदमय कंद भानुकुल केतु।
राम शुद्ध हैं, सत्-चित्-आनंदमय मूल हैं और सूर्यवंश की ध्वजा हैं।
English explanation
Rama is pure, the source embodying being, consciousness, and bliss, and the banner of the solar dynasty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुध्द | शुद्ध, निर्मल | pure; untainted |
| सचिदानंदमय | सत्, चेतना और आनंद से पूर्ण | embodying being, consciousness, and bliss |
| कंद | मूल, स्रोत | root; source |
| भानुकुल | सूर्यवंश के | of the solar dynasty |
| केतु | ध्वजा, गौरव-चिह्न | banner; emblem of glory |
2 चरित करत नर अनुहरत संसृति सागर सेतु।।87।।
संसाररूपी सागर को पार करने के सेतु राम मनुष्यों का अनुकरण करते हुए चरित्र करते हैं।
English explanation
Rama, the bridge across the ocean of worldly existence, performs deeds in imitation of human conduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरित | चरित्र, आचरण के कार्य | deeds; acts |
| करत | करते हैं | performs |
| नर | मनुष्य का | human beings |
| अनुहरत | अनुकरण करते हुए | imitating |
| संसृति | संसार, जन्म-मरण का चक्र | worldly existence; the cycle of birth and death |
| सागर | सागर | ocean |
| सेतु | पार कराने वाला पुल | bridge enabling passage across |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 87
- स्रोत अभिलेख
- 2.87
- सहायक विषय
- श्रीरामका शृङ्गवेरपुर पहुँचना, निषादके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 415, 416
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