अयोध्याकाण्ड · दोहा 86 · दोहा/सोरठा
राम दरस हित नेम ब्रत लगे करन नर नारि।
राम दरस हित नेम ब्रत लगे करन नर नारि।
मनहुँ कोक कोकी कमल दीन बिहीन तमारि।।86।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.86 · पुस्तक पृ. 414, 415
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम दरस हित नेम ब्रत लगे करन नर नारि।
राम के दर्शन के लिए स्त्री-पुरुष नियम और व्रत करने लगे।
English explanation
Men and women began observing religious disciplines and vows to see Rama again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | of Rama |
| दरस | दर्शन | the sight |
| हित | के लिए | for the sake of |
| नेम | नियमित धार्मिक अनुशासन | religious disciplines |
| ब्रत | व्रत | vows |
| लगे | लग गए | began |
| करन | करने | to observe |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
2 मनहुँ कोक कोकी कमल दीन बिहीन तमारि।।86।।
मानो वे सूर्य के बिना दीन हुए चक्रवाक, चक्रवाकी और कमल हों।
English explanation
They were like male and female ruddy shelducks and lotuses, forlorn without the sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनहुँ | मानो | as though |
| कोक | नर चक्रवाक पक्षी | male ruddy shelduck |
| कोकी | मादा चक्रवाक पक्षी | female ruddy shelduck |
| कमल | कमल | lotuses |
| दीन | दुःखी; म्लान | forlorn |
| बिहीन | से रहित | without |
| तमारि | सूर्य | the sun |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 86
- स्रोत अभिलेख
- 2.86
- सहायक विषय
- श्रीराम-सीता-लक्ष्मणका वनगमन और नगर-निवासियोंको सोये छोड़कर आगे बढ़ना
- मुद्रित पृष्ठ
- 414, 415
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