अयोध्याकाण्ड · दोहा 76 · दोहा/सोरठा
सीय सहित सुत सुभग दोउ देखि देखि अकुलाइ।
सीय सहित सुत सुभग दोउ देखि देखि अकुलाइ।
बारहिं बार सनेह बस राउ लेइ उर लाइ।।76।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.76 · पुस्तक पृ. 406, 407
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सीय सहित सुत सुभग दोउ देखि देखि अकुलाइ।
सीता सहित दोनों सुंदर पुत्रों को बार-बार देखकर राजा व्याकुल हो उठते हैं।
English explanation
Looking repeatedly at his two handsome sons together with Sita, the king grows distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता | Sita |
| सहित | साथ | together with |
| सुत | पुत्र | sons |
| सुभग | सुंदर | handsome |
| दोउ | दोनों | both |
| देखि | देखकर | looking at |
| देखि | बार-बार देखकर | looking again |
| अकुलाइ | व्याकुल होकर | growing distressed |
2 बारहिं बार सनेह बस राउ लेइ उर लाइ।।76।।
स्नेह के वश में राजा उन्हें बार-बार अपने हृदय से लगा लेते हैं।
English explanation
Overcome by affection, the king repeatedly clasps them to his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बारहिं | बार-बार | repeatedly |
| बार | बार; अवसर | time; occasion |
| सनेह | स्नेह के | of affection |
| बस | वश में | under the sway |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| लेइ | ले लेते हैं | takes them |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लाइ | लगाकर | clasping |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 76
- स्रोत अभिलेख
- 2.76
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 406, 407
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