अयोध्याकाण्ड · दोहा 49 · दोहा/सोरठा
सीय कि पिय सँगु परिहरिहि लखनु कि रहिहहिं धाम।
सीय कि पिय सँगु परिहरिहि लखनु कि रहिहहिं धाम।
राजु कि भूँजब भरत पुर नृपु कि जिइहि बिनु राम।।49।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.49 · पुस्तक पृ. 384, 384
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सीय कि पिय सँगु परिहरिहि लखनु कि रहिहहिं धाम।
क्या सीता अपने पति का साथ छोड़ देंगी? क्या लक्ष्मण घर में रहेंगे?
English explanation
Will Sita abandon her husband’s company? Will Lakshmana remain at home?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| कि | क्या | will |
| पिय | पति का | her husband’s |
| सँगु | साथ | company |
| परिहरिहि | छोड़ देंगी | abandon |
| लखनु | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| कि | क्या | will |
| रहिहहिं | रहेंगे | remain |
| धाम | घर में | at home |
2 राजु कि भूँजब भरत पुर नृपु कि जिइहि बिनु राम।।49।।
क्या भरत नगर में राज्य का भोग करेंगे? क्या राजा दशरथ राम के बिना जीवित रहेंगे?
English explanation
Will Bharata enjoy kingship in the city? Will King Dasharatha survive without Rama?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजु | राज्य | kingship |
| कि | क्या | will |
| भूँजब | भोग करेंगे | enjoy |
| भरत | भरत, कैकेयी के पुत्र | Bharata, Kaikeyi’s son |
| पुर | नगर में | in the city |
| नृपु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कि | क्या | will |
| जिइहि | जीवित रहेंगे | survive |
| बिनु | बिना | without |
| राम | राम | Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 49
- स्रोत अभिलेख
- 2.49
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 384, 384
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