अयोध्याकाण्ड · सोरठा 50 · सोरठा
सखिन्ह सिखावनु दीन्ह सुनत मधुर परिनाम हित।
मूल पाठ
सखिन्ह सिखावनु दीन्ह सुनत मधुर परिनाम हित।
तेइँ कछु कान न कीन्ह कुटिल प्रबोधी कूबरी॥ ५०॥
स्रोत अभिलेख 2.5 · पुस्तक पृ. 385, 385
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार सखियोंने ऐसी सीख दी जो सुननेमें मीठी और परिणाममें हितकारी थी। पर कुटिला कुबरीकी सिखायी-पढ़ायी हुई कैकेयीने इसपर जरा भी कान नहीं दिया॥ ५०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 386 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सखिन्ह सिखावनु दीन्ह सुनत मधुर परिनाम हित।
English explanation
Her companions offered counsel that was pleasant to hear and beneficial in its outcome.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखिन्ह | सखियों ने | her female companions |
| सिखावनु | सीख या सलाह | counsel |
| दीन्ह | दी | gave |
| सुनत | सुनने में | to hear |
| मधुर | मधुर | pleasant |
| परिनाम | परिणाम में | in its outcome |
| हित | हितकारी | beneficial |
2तेइँ कछु कान न कीन्ह कुटिल प्रबोधी कूबरी॥ ५०॥
English explanation
But Kaikeyi, tutored by the deceitful hunchback Manthara, paid no heed at all to that counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेइँ | उसने, अर्थात कैकेयी ने | she, meaning Kaikeyi |
| कछु | कुछ भी या तनिक भी | at all |
| कान | कान या ध्यान | ear or heed |
| न | नहीं | not |
| कीन्ह | दिया | paid |
| कुटिल | कुटिल या कपटी | deceitful |
| प्रबोधी | समझाई या सिखाई हुई | tutored or persuaded |
| कूबरी | कुबड़ी मंथरा द्वारा | by the hunchback Manthara |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- सोरठा 50
- स्रोत अभिलेख
- 2.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 386
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 385, 385
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।